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कैसे राज महाजन ने तय किया साइबर कैफे से संगीत कम्पनी तक का सफ़र

टाइपिंग करते करते बन गए एक मोक्ष म्युज़िक कम्पनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और संगीतकार

भारत की अग्रणी म्युज़िक कंपनियों में से एक ‘मोक्ष म्युज़िक कंपनी’ के गाने पुरे विश्व में सुने जाते हैं ! मोक्ष म्युज़िक प्राइवेट लिमिटेड ने बहुत ही कम समय में बहुत अच्छा मुकाम हासिल किया है, जिसका श्रेय राज महाजन को जाता है ! दिल्ली स्थित इस म्युज़िक के संस्थापक और मैनेजिंग डायरेक्टर राज महाजन जोकि एक संगीतकार भी हैं से एक मुलाक़ात में हमने जाना उनके संघर्ष बारे में ! मोक्ष म्युज़िक के अलावा राज महाजन बिनाकाट्यून्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के भी मैनेजिंग डायरेक्टर हैं ! बिनाकाट्युन्स डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन एंड सॉफ्टवेर टेक्नोलॉजी में एक अग्रणी कम्पनी है ! राज महाजन ने आज जो मुकाम हासिल किया है, वो इतना आसान नहीं था ! उसके पीछे राज की अथक तपस्या और लगन है ! बिना किसी गॉडफादर और सपोर्ट के इस प्रकार एक कम्पनी को विश्व स्तर खडा करना इतना आसान नहीं था ! राज ने बताया कि एक समय में उनके पास न पैसा था और न ही कोई सपोर्ट ! लेकिन सपने बहुत बड़े थे !

राज एक मध्यवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते थे ! पैसे की कमी और स्वाभिमान के कारण राज ने स्वयं ही पढ़ाई को छोड़ दिया ! लेकिन राज ने सीखना नहीं छोड़ा ! राज को बचपन से ही किताबें पढने का बहुत ही शौक था ! अपने इस शौक के लिए राज लोगों से किताबें मांग मांग कर पढ़ते थे ! किताबों के शौक ने राज को बहुत ही विवेकपूर्ण बना दिया था ! छोटी से उम्र में राज ने काम करना सिख लिया था जिससे अच्छा यह हुआ कि छोटी सी उम्र में राज बड़ो की तरह व्यवहारिक हो गए ! जो उम्र सिखने की थी उस उम्र में काम करने के कारण राज के सामने चुनौती थी की संगीत को कैसे सिखा जाए और कैसे अभ्यास किया जाए ! राज ने उत्साहित होकर बताया, “म्यूज़िक का शौक मुझे बचपन से था। बचपन से ही नयी नयी धुन बनाना मेरा शौक भी था और मैं बहुत जल्दी गीत के साथ-साथ धुन भी बना लिया करता था । एक मध्यम वर्गीय परिवार में संगीत का कुछ ख़ास स्थान नहीं था जोकी मेरे लिए बहुत बड़ी चुनौती था। दिन में स्कूल के बाद दूकान पर मेहनत करने के बाद म्यूज़िक के लिए समय निकालना मेरे लिए बहुत मुश्किल होता था।  लेकिन मैंने संगीत के प्रति अपने जूनून और तपस्या को कभी नहीं छोड़ा। मैं संगीत को अनौपचारिक तौर पर सीखता रहा.  लेकिन जिस प्रकार के परिवार और माहौल में मैं रह रहा था वहाँ पर अपने आपको संगीत के क्षेत्र में ‘सफल’ भी साबित करना था। संगीत में मेरा कोई गॉडफादर नहीं था और ना ही मेरी आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि मैं संगीत की औपचारिक शिक्षा ले सकूं। कैसे न कैसे मैं संगीत के लिए समय निकाल लिया करता था !”

राज ने बताया की उनके पास म्युज़िक कीबोर्ड नहीं था ! और वो हमेशा म्युज़िक कीबोर्ड खरीदना चाहते थे! उनको कैसे न कैसे एक कीबोर्ड चाहिए था ! उनकी यह इच्छा इतनी प्रबल थी की उनको सपनो में भी कीबोर्ड दिखता था ! राज ने अपना पहला म्युज़िक कीबोर्ड अपनी ही दूकान से पैसे चोरी करके ख़रीदा था ! उन्होंने प्लान किया कि वो अतिरिक पैसा कमाकर दूकान का पैसा पूरा कर देंगे ! लेकिन किसी कारणवश ऐसा हो नहीं पाया था !

राज ने बताया कि अपनी दूकान से ड्यूटी करने के बाद कभी सुबह 4 बजे जल्दी उठकर अपने गुरु सज्जाद खान साब से संगीत सिखने जाया करते थे और कभी देर रात को वो गायक तोची रैना के साथ संगीत का अभ्यास करते थे ! अपने संगीत प्रेम के चलते वो रातों को छुपकर जागरणों में दूर तक चले जाया करते थे ! वो कैसे उन्होंने कम उम्र में आटा, पान की दूकान, कचोरी, लोटरी, साइबर कैफ़े जैसे काम किये ! राज को याद है की उन्होंने किस प्रकार सिखने की जिद के चलते खराद मशीन पर खड़े होकर अपने पाँव जलाए ! शायद यही वजह है की राज हर छोटे काम करने वालो से कभी भी मिलते हैं तो बड़े प्रेम से बात करते हैं और उनका आदर करते हैं ! राज की मृदुभाषिता के कारण राज को बहुत लोग पसंद करते हैं ! इसके साथ ही, राज अपनी जिज्ञासा और लगन के चलते संगीत और सॉफ्टवेर टेक्नोलॉजी सीखते रहे ! साइबर कैफे के दौरान प्रैक्टिस करते-करते राज कंप्यूटर में भी पारंगत हो चुके थे ! कई कई रातों को टाइपिंग करते करते राज की टाइपिंग स्पीड रेल की तरह हो गयी थी ! उस समय, जो भी राज को उँगलियों की कीबोर्ड पर टाइप करते हुए देखता था, वो अपने दांतों तले ऊँगली दबा लिया करता था ! इसके बाद समय बचते ही राज फिर म्युज़िक कीबोर्ड पर अपनी उंगलियाँ चलाया करते थे! जितने पारंगत राज कंप्यूटर पर थे उतनी ही तेज़ उंगलियाँ म्युज़िक कीबोर्ड पर चलाया करते थे ! जो लोग राज को पहले से जानते हैं, उन्हें पता है की कैसे राज साइबरकैफ़े पर आने वाले ग्राहकों को कीबोर्ड बजा कर गाने सुना सुना कर उनका मन बहलाया करते थे ! शायद साइबरकैफ़े पर आने वाले उन ग्राहकों को भी नहीं पता था की राज के गाने आने वाले समय में पूरी दुनिया में सुने जायेंगे !

समय के साथ-साथ राज ने ‘मोक्ष म्यूज़िक’ और ‘बिनाकाट्यून्स’ की स्थापना बहुत ही कम पूँजी के साथ बहुत ही छोटे स्तर से की और भगवान के आशीर्वाद और चाहने वालों के प्यार ने ‘मोक्ष म्यूज़िक’ और ‘बिनाका ट्यून्स’ को सफलता के मुकाम पर खड़ा कर दिया। राज महाजन ने इस दौरान बहुत सारे कलाकारों को प्रमोट किया ! इस दौरान राज की मुलाक़ात रमेश मिश्रा से हुई और दोनों ने राज-रमेश के नाम से संगीतकार जोड़ी बनाने का फैसला किया ! बतौर संगीतकार जोड़ी राज महाजन और रमेश मिश्र कई गाने मोक्ष म्युज़िक के माध्यम से लांच कर चुके हैं ! एक सफल उद्यमी के साथ ही साथ राज महाजन एक सफल संगीतकार भी बन चुके हैं ! राज के संगीत में नयापन है ! राज बताते हैं, “गाने से पहले मैं कांसेप्ट पर काम करता हूँ और हमेशा ही कुछ नया करने की कोशिश करता हूँ !” जब उनसे पूछा गया की आजकल के जो गाने हैं बॉलीवुड में वो पिछले ज़माने से बिल्कुल अलग है ! यह जो बदलाव आया है वो किस तरह सही है, तो वो बताते हैं, “संगीत में समय के साथ साथ हमेशा ही परिवर्तन आता रहा है। परिवर्तन हमेशा होते रहना चाहिए। हम परिवर्तन को सही मानते हैं। लोगो की सोच बदल रही है , फैशन बदल रहा है, तकनीक बदल रही है ऐसे में संगीत में बदलाव भी लाज़मी है। हर संगीत का एक दौर होता है उसके बाद श्रोताओं को भी कुछ नया चाहिए होता है। और सही संगीत वो होता है जो सुनने वाले को आनंद दे, ऐसा संगीत जो सुनने वाले को आनंद न दे पाये वो निरर्थक है !” जब राज से पूछा गया कि आजकल के गीत में बोल भद्दे और अर्थहीन होते हैं और लोग ज्यादातर रैप और आयटम सॉग सुनना पसंद करते हैं ! इस प्रकार अच्छा संगीत खत्म हो रहा है ! तो इस आर्ट को हमें किस तरह बचाना चाहिए ? राज ने कहा, “ऐसा नहीं है कि क्लासिकल म्यूज़िक और ग़ज़ल खत्म हो रहे हैं।  संगीत का क्षेत्र बहुत विशाल हो गया है। क्लासिकल म्यूज़िक का बहुत अच्छा प्रैक्टिकल उपयोग अब लाइट म्यूज़िक में भी होने लगा है। एक बात और है कि अगर आप ध्यान से देखेंगे तो रैप और आइटम सांग पहले भी हुआ करते थे। पिया तू अब तो आ जा, चढ़ गयो पापी बिछुआ, तोरा मन बड़ा पापी, होंठों पे ऐसी बात, चोली के पीछे क्या है, जैसे आइटम सांग्स  बहुत ही प्रसिद्ध हुए हैं। पहले के गानो में छन्दो का प्रयोग होता था। उसी का संशोधित रूप आज का रैप है, फर्क इतना है कि आज के रैप म्यूज़िक में शुद्ध हिंदी के अलावा बातचीत की आम भाषा को भी शामिल कर लिया गया है। नए गायक कलाकार बहुत ही प्रतिभावान हैं. हम जल्दी ही क्लासिकल आधारित गाने और ग़ज़ल के एल्बम भी लाएंगे !”

राज ने अपने आने वाले प्रोजेक्ट्स के बारे में भी बताया, “हमने अपने आने वाले गानो में सभी आयु वर्ग के श्रोताओं का ध्यान रखा है। हम अपने संगीत में नित नए प्रयोग भी करते रहते हैं।  बच्चो के लिए ‘टेबल सांग’ है, जिसकी धुन पर बच्चे नाचेंगे और इस गाने में खास बात यह है की इस गाने सिर्फ पहाड़े और बच्चो की पोयम्स (कविताओं) का प्रयोग किया है। अभी हाल ही में हमने हनुमान चालीसा को भी नयी धुन में और नए ज़माने के संगीत में ‘नव हनुमान चालीसा’ के नाम से लांच किया था, जो श्रोताओं द्वारा बहुत ही पसंद किया गया.. उसी तर्ज़ पर हम ओम जय जगदीश हरे आरती और गायत्री मंत्र को नए प्रकार के संगीत में लेकर आ रहे है। इसके अलावा, हमारे आने वाले गानो में जाना-जाना (सिंगर अरुण उपाध्याय), अलविदा (गायक प्रवेश सिसोदिया), फुकरी (गायक के डी डूड और प्रवेश), बेबी लुकिंग युम्मी युम्मी (गायक के डी डूड और प्रवेश), बंजारा (गायक विशाल घाघट) आदि हैं. हम एक और ऐसा गाना भी बना रहे हैं जिसमे सभी धर्मो के मंत्र-श्लोकों इत्यादि को एकत्रित करके बनाया जाएगा !